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Daati gurmantra ke adbhut deshi nuskh part - 3
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पुरातन काल से हमारे देश में देसी नुसखों से रोगोपचार होता आ रहा है। इसे घरेलू चिकित्सा या दादी-नानी के नुसखे भी कहा जता है। यह एक ऐसा उपचार है जिससे हमने अपने जीवन में कभी न कभी लाभ भी अवश्य उठाया होगा। वास्तव में ये नुसखे आयुर्वेद में बतायी गयी औषधियों से ही तैयार होते हैं। इन नुसखों को तैयार करने के लिए कोई जटिल प्रक्रिया नहीं रहती साथ ही इसमें प्रयुक्त औषधियां और सामग्रियां हमारे घर मे या घर के आस-पास ही उपलब्ध हो जाती हैं। इसी लिए इन्हें घरेलू उपचार भी कहते हैं। इन्हें बनाने व प्रयोग करने की जारी हमें घर में ही पीढ़ी दर पीढ़ी प्राप्त होती रहती है। इन्हें बनाने के लिए अलग से कोई टे्रनिंग नहीं लेनी पड़ती। देसी नुसखों से की जाने वाली चिकित्सा विधि आयुर्वेद से ही उत्पन्न हुई है। लेकिन यह चिकित्सा अति सरल विधियों से घर में ही निर्मित की जाने वाली दवाइयों से की जाती है। आयुर्वेदिक चिकित्सा के सभी ग्रंथों की रचना संस्कृत भाषा में होने की वजह से संस्कृत न जानने वालो लिए अति कठिन है। जन साधारण को तो आयुर्वेद चिकित्सा के प्रमुख ग्रंथ सुश्रत संहिता, चरक संहिता, भैषज्य रत्नावली, चक्रदत्त, द्रव्य गुण विज्ञान, धन्वतरि निघण्टु भाव प्रकाश, योग चिंतामणि, सिद्धयोग संग्रह, शार्ङ्गधा संहिता, वाग्भट्ट, वनौषधि चंद्रोदय रसेन्द्र सार संग्रह, रस रतन सम्मुच्चय, रसतरंगिणि, रसतंत्र सार, योग रत्नाकर, निघंटु रत्नाकर आदि का नाम भी मालूम नहीं होगा। आयुर्वेदिक चिकित्सा से जुड़े लोगों को भी इन्हें समझने में कठिनाई होती है। ज्यादातर वैद्य इन ग्रंथाें के अनुवादों से ही काम चलाते हैं। लेकिन पीढ़ी-दर-पीढ़ी से मिली जानकारी के आधार पर व्यावहारिक रूप से देसी नुसखों को बनाने और उनसे उपचार करने की विधि अच्छी तरह समझ लेने की वजह से लोग इनका प्रयोग भी बेझिझक करते हैं। और इनसे लाभान्वित भी होते हैं। लेकिन आयुर्वेद के सभी दवाइयों का निर्माण घर में पड़ी वस्तुओं से ही नहीं हो पाता और हर देश व मौसम में सभी वनौषधियां भी उपलब्ध नहीं होती हैं। इसलिए उन्हें लेने के लिए जड़ी-बूटियों की दुकानों का सहारा लेना पड़ता है। कुछ आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने वाली कंपनियां भी हैं जो रोगोपचार के लिए आयुर्वेदिक दवाइयों का निर्माण करती हैं और ज्यादातर लोग उनकी औषधियों से भी लाभ उठाया करते हैं। किंतु कुछ विशिष्ट रोगों के उपचार के लिए विशिष्ट नुसखे भी वैद्यों द्वारा बनाये जाते हैं जिनकी बनी बनाई औषधियां नहीं मिलतीं, उन्हें घर में ही बनाना पड़ता है। देसी नुसखों से इलाज करने के बढ़ते रुझान को देखकर लोगों की सुविधा के लिए मैंने इस पुस्तक में सभी प्रमुख रोगों के देसी-नुसखों और सरल आयुर्वेदिक नुसखों का संकलन कर पुस्तकाकार में प्रस्तुत किया है। मैंने इस पुस्तक में सबसे पहले रोगों का संक्षिप्त परिचय व लक्षण भी लिखा है साथ ही उनके उपचार के अनेक नुसखों का उल्लेख किया है। आधुनिक परिवेश और आहार-विहार में हुए बदलाव को देखकर जिस प्रकार के रोगों से जन साधारण को ज्यादा रू-ब-रू होना पड़ता है, उनके उपचार के नुसखे इस पुस्तक में विशेष रूप से संकलित किये गये हैं। इस पुस्तक में बाल-वृद्ध सबको लाभान्वित करने वाली औषधियों का वर्णन किया गया है। सामान्य रोगों से लेकर दु:साध्य रोगों की चिकित्सा के अनेकानेक नुसखे इस पुस्तक में प्रस्तुत किये गये हैं। संक्रामक रोगों और दुर्घटनाओं से पीड़ित लोगों के उपचार में लाभप्रद नुसखों का भी उल्लेख इस पुस्तक में प्रचुर मात्रा में किया गया है। यह एक ऐसी पुस्तक है जिसकी सहायता से शहर-देहात हर जगह रोगोपचार किया जा सकता है। लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सिर से पांव तक होने वाले प्रमुख रोगों के अनेकानेक नुसखे बतलाए गये हैं ताकि देश-काल परिस्थिति के अनुसार उनसे लाभ उठाया जा सके। कुछ रोग बडी क़ठिनाई से काबू में आते हैं, उन्हें दु:साध्य वर्ग की श्रेणी के अंतर्गत संकलित किया गया है। कुछ छुआछूत से फैलने वाले रोगों को संक्रामक रोगों की श्रेणी में रखा गया है। स्त्रियों को होने वाले रोगों को भी अलग श्रेणी में रखा गया है ताकि नुसखों को ढूंढ़ने में लोगों को आसानी हो। इसी प्रकार विष कीटों के दंश व सर्प दंश व कुत्तों के काटने के उपचार में काम आने वाले नुसखे भी बताए गये हैं। दुर्घटना व नशा के दुष्प्रभावों को दूर करने वाले नुसखे भी अलग-अलग शीर्षकों में संकलित किये गये हैं ताकि लोग जरूरत पड़ने पर आसानी से उन्हें ढूंढकर लाभान्वित हो सकें। मैं अपनी कलम को विराम दूं उससे पहले एक बात और कहना चाहता हूं कि अपनी घुमंतू जीवन में मुझे देसी उपचार संबंधी बहुत सारी जानकारी फकीरों, संत महात्माओं व अनुभवी गुरुजनों से मिलती रही जिनमें से कुछ नुसखों को मैं नोट भी करता जाता था और उन्हीं नुसखों को मैं विभिन्न व्याख्यानों व टी.वी. चैनलों के माध्यम से लोगों को बताता रहा हूं। लोगों में इन नुसखों की अधिक मांग होने की वजह से मैंने इन सारे नुसखों को संकलित कर पुस्तक का रूप देने का मानस बताया। इस पुस्तक में संकलित अधिकांश नुसखों को मैंने अपने जीवन में प्रयोग किया अथवा करवाया। इनसे लाभान्वित होने वाले लोगों के कृतज्ञता भरे चेहरों का स्मरण आते ही रोमांच हो आता है और यही वजह है कि मैं इसे पुस्तक के रूप में प्रस्तुत कर रहा हूं। एक बात को बड़ी विनम्रता के साथ आपके सम्मुख रख रहा हूं कि ये नुसखे संत महात्माओं, मनीषी एवं विद्वानों की धरोहर है मेरा इसमें व्यक्तिगत कुछ भी नहीं है। कुछ व्यक्तिगत है तो मेरा अनुभव है। इसलिए मेरा निवेदन है कि प्रयोग में लाने से पहले रोगी की स्थिति को देखते हुए किसी अनुभवी व्यक्ति या चिकित्सक की सलाह पर ही इन नुसखों का प्रयोग उचित रहेगा। ये नुसखे हमारे प्राचीन मनीषियों की तपस्या से प्रकट हुए हैं। यह उन्हीं की विरासत है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी तक पहुंचे हैं। किंतु कालक्रम से आये बदलाव और विदेशी दवा के प्रति बढ़ते झुकाव की वजह से अपने ही पूर्वजों की इस अनमोल विरासत को हम सब भूलते जा रहे हैं। यह एक राष्ट्रीय चिंता का विषय है कि हम अपने ही राष्ट्र की धरोहर औषधियों को आज भूलते जा रहे हैं। यह एक गंभीर समस्या है और सरकार को योजनाबद्ध तरीके से अपनी राष्ट्रीय बौद्विक क्षमता को विदेशी कंपनियों द्वारा की जा रही लूट को रोकने का अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से मुद्दा उठाना चाहिए ताकि हमारे ही पूर्वजों के नुसखों का विदेशी कंपनियों द्वारा पेटेंट कराए जाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जा सके। मैं चाहता हूं कि हमारे देश के लोग अपने पूर्वजों की अमानत की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्प के साथ प्रतिबद्ध हों और देसी नुसखों के चमत्कारी लाभ से परिचित रहें। इस पुस्तक में देसी नुस्खों के संकलन के माध्यम से मैंने लोगों के मन में अपनी विरासत को पहचानने और घर के आस-पास फैली जड़ी-बूटियों और औषधीय पौधों के गुणों से परिचित हो उनके संरक्षण के लिए व्यक्तिगत स्तर से उचित पहल करने के लिए जागरुक हों। आशा है, यह पुस्तक उस उद्देश्य की पूर्ति में अपनी अहम भूमिका निर्वाह करेगी तथा अनुभवी चिकित्सकों की सहायता से लोग इन देसी नुसखों का उपयोग कर अपना और जरूरतमंदों की चिकित्सा कर लाभान्वित होंगे। और पुण्य के भागी भी बनेंगे। इस पुस्तक से यदि किसी ने थोड़ा भी लाभ उठाया तो मैं अपना परिश्रम सार्थक समझूंगा।
 
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Last updated on 20-10-2017
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