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Saphalta mai badhak tanav
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इस संसार में ऐसे लोग अधिकतर मिलते हैं जो लक्ष्य निर्धारित करने के बावजूद अपने आपको पूरी तरह अशक्त और अयोग्य मान बैठे हैं। वे अक्सर कहा करते हैं कि मैंने अपनी क्षमता से अधिक वजन उठा लिया है। मैंने जिसे बहुत आसान समझा था, वह बहुत कठिन है। मेरा अनुमान व आकलन गलत निकला ... इत्यादि इत्यादि। किंतु ऐसा नहीं है कि कोई भी मनुष्य अपनी क्षमता का सही आकलन नहीं कर सकता। आपने देखा होगा कि परमात्मा के बनाये छोटे से छोटे प्राणियों में भी वह क्षमता मौजूद है। अत: सृष्टि का सिरमौर कहे जाने वाले प्राणी मनुष्य में उस क्षमता का अभाव हो, यह मानने वाल बात नहीं। यह तो मात्र भ्रम है। अत: भ्रम की गिरफ्त से बाहर निकलें और उन्मुक्त भाव से विचार करें कि आप अपने लक्ष्य को हासिल करने में पर्याप्त प्रयास करने के बावजूद असफल क्यो हो रहे हैं? कहीं आप के संकल्प की दृढ़ता ही तो संदेह के दायरे में नहीं है? कहीं आप पर्याप्त प्रयास करने से तो जी नहीं चुरा रहे हैं? कहीं अज्ञानता जनित अकर्मण्यता का अंधकार तो आप पर बुरी तरह हावी नहीं हो गया है जो आपको कर्म से विमुख हो जाने के लिए प्रेरित कर रहा है? याद रहे, मनुष्य योनि कर्म प्रधान योनि है। यह योनि पाना एक सुर दुर्लभ सुअवसर है। इसमें जीव पशुता से ऊपर उठ एक ऐसी स्थिति में होता है जब वह कर्म का अवलंबन ले न केवल देवत्व की सीढ़ी पर पहुंच सकता है बल्कि उससे भी आगे मोक्ष की स्थिति का भी आनंद ले सकता है। किंतु वह यदि इस सुअवसर का सही आकलन न करे तो अज्ञानता का अंधकार उसे अकर्मण्य बन पशुता की स्थिति में पहुंचाने में जरा भी देर नहीं करता। यदि आपके साथ ऐसा नहीं हो रहा है तो निश्चित समझिए कि आप अपने लक्ष्य को पाने में सफलता सिर्फ इसलिए हासिल नहीं कर पा रहे हैं कि आप किसी न किसी वजह से तनाव ग्रसित हो गये हैं। क्योंकि तनाव एक ऐसा बहुरुपिया दानव है जो विविध रूप धारण कर मनुष्य को मानसिक व शारीरिक दोनों स्तर पर झकझोर देता है। यदि सर्वेक्षण किया जाये तो लक्ष्य पाने में सफलता न मिलने की अनेक वजहों में तनाव एक प्रमुख कारण है। अधिकांश लोग तनाव-पीड़ित होने की वजह से ही लक्ष्य तक पहुंचने में सफलता हासिल नहीं कर पाये हैं। प्रभु की कृपा से इस पुस्तक में मेरे व्याख्यानों से उन्हीं पहलुओं को संकलित किया गया है जिसमें सफलता में बाधक बनने वाले तनाव के विविध रूपों की चर्चा करते हुए उसे मापने व दूर करने के सैद्धांतिक व व्यावहारिक पहलुओं पर भरपूर प्रकाश डाला गया है।
 
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Last updated on 22-04-2018
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