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Andar Ki laalsa
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मैं नहीं कहता कि उसे अवतार कहा जाय या पैगम्बर, प्रभु का पुत्र कहा जाय या सद्गुरु, वह जो भी होता है वह मनुष्य को सही मार्ग दर्शाता है जिससे उसका जीवन सार्थक हो जाता है। समय के महापुरुष सदैव यह बात समझाते रहते हैं कि परमात्मा को पाने के लिए हमें बाहरी आचार-विचार, व्रत-तीर्थ, जप या किसी खास वेशभूषा अथवा बाह्याडम्बर की जरूरत नहीं होती। समय के महापुरुष लोगों को समाज से अलग रहने अथवा अपने सांसारिक दायित्वों से भागने का समर्थन भी नहीं करते। वे तो लोगों को एक अच्छे नागरिक, अच्छे पति, पत्नी, पुत्र, मित्र, भाई-बहन आदि का कर्तव्य निभाने की बात करते हैं। परंतु इस बात के लिए सावधान भी करते हैं कि अपने सांसारिक दायित्वों का निर्वाह करते समय हमें उसी में इतना नहीं उलझ जाना चाहिए कि हम अपने जीवन का असली उद्देश्य ही भूल जाएं। - दाती महाराज
 
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Last updated on 22-04-2018
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