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Kya hai Shani ki Sadhesatti aur Dhaiya
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शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के संबंध में न केवल जन साधारण बल्कि पढ़े-लिखे विद्वान भी अनेक भ्रांतियों के शिकार हैं। यहां तक कि अपने को आधुनिक व प्रगतिशील कहने वाले लोग भी शनिदेव का नाम सुनते ही सिहर उठते हैं और छिपे रूप में ही सही उसकी शांति का उपाय करने के लिए तत्पर हो जाते हैं। लोग शनिदेव का नाम सुनते ही किसी अनिष्ट की आशंका करने लगते हैं। और बात जब शनिदेव की साढ़ेसाती या ढैय्या की आती है तो अच्छे भले लोगों की कंपकंपी छूट जाती है। लेकिन लोगों की ऐसी सोच निराधार और बेतुकी है। तथ्य की जानकारी न होने की वजह से ही लोग ऐसा सोचने को मजबूर हो जाते हैं। वास्तव में शनिदेव अन्य ग्रहों के समान ही जीवों के कर्मफलों का भुगतान करते हैं। जिस प्रकार बारह राशियों व बारह भावों में अन्य ग्रह अलग-अलग प्रकार के फल देते हैं, शनिदेव भी वैसा ही करते हैं। अपनी दशाओं में हर ग्रह जातक को अधिकतम शुभाशुभ फल प्रदान करते हैं और गोचर में उनकी स्थिति का भी विशेष प्रभाव पड़ता है। ऐसा ही नियम शनिदेव के साथ भी लागू होता है। अत: शनिदेव की साढ़ेसाती या ढैय्या का फल भी हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होता है। उदाहरणत: अग्नि तत्व राशियों के जातकों के लिए साढ़ेसाती अपेक्षाकृत अधिक कष्टकारी होती है चूंकि इन राशियों में शनिदेव किसी त्रिकोण का स्वामी नहीं होता है। वृष व तुला में शनिदेव चूंकि पूर्ण योगकारक ग्रह होता है, उन्हें अपेक्षा से अधिक शुभ परिणाम अधिक देता है। इसलिए इनका नाम सुनते ही भयभीत होने की आवश्यकता नहीं। सही स्थिति जानने के लिए जन्मकुंडली का ज्योतिषीय विश्लेषण आवश्यक है। जब आप गहन अध्ययन करेंगे तो स्वयं आपको लगेगा कि जितनी बातें शनिदेव के बारे में आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर लोगों द्वारा कही गयी हैं वे व्यर्थ की भ्रांतियां फैलाने वाली हैं और भ्रांतियां हमेशा भ्रम पैदा करती हैं। मेरा आपसे अनुरोध है कि ऐसे भ्रम से बाहर आयें और अनुभूति के आधार पर इस विषय के बारे में जानने की कोशिश कीजिए। यदि ऐसा करेंगे तो बहुत कुछ आपको हासिल होगा। आपको पता चलेगा कि शनिदेव शत्रु नहीं है मित्र हैं। अमंगलकारी नहीं, मंगलकारी हैं। और आप यह भी महसूस करेंगे कि जो संपूर्ण संसार को भय से मुक्त करता है उससे भय करने की कोई आवश्यकता नहीं है। एक बात अवश्य जान लें कि जो कुछ भी हमें मिल रहा है, चाहे वह लाभ हो चाहे हानि, चाहे सुख हो, चाहे दुख, चाहे नफा हो चाहे नुकसान, यह सबकुछ हमारे निजकर्मों के आधार पर है क्योंकि शनिदेव तो मानव के किये गये कर्मों के विपुल भंडार में से किस कर्म का फल कितना, किस प्रकार और कैसे भुगतवाना हैं, यही है काम शनिदेव का। न वह अच्छा फल देते हैं और न बुरा फल देते हैं।
 
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