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पैरों की बिवाइयां
पैरों में बिवाइयां फट गयी हों तो उनके उपचार के लिए शलगम को उबालकर उस पानी से पैरों को धोकर शलगम को रगड़ें। फिर इस पर कपड़ा लपेटकर सो जाएँ। कुछ दिन तक ऐसा करते रहने से बिवाइयाँ बिलकुल ठीक हो जाती है।
बिवाइयों के उपचार में पीपल का दूध बहुत उपयोगी है। पीपल के पत्ते तोडऩे पर जो दूध निकले उसे बिवाई में भर दें। अगर बिवाई दर्द करती हो तो पीपल के पत्ते कूट-पीसकर पानी में उबाल लें और उसी सुहाते पानी में रु£ई भिगोकर बिवाई में बार-बार निचोड़ें। इससे दर्द शांत हो जाएगा। 10-15 मिनट पानी पडऩे पर बिवाई की कठोर दरारें नर्म पड़ जाएँगी और रक्त£ संचार तेजी से होगा। अब बिवाई में पीपल का दूध टपकाकर भर दें और दूध में भीगा रु£ई का फाहा बिवाई पर रखकर पट्टी लपेट के सो जाएं। दिन में जुराब पहनें और जूता-चप्पल का इस्तेमाल करें जिसमें एडिय़ाँ बाहर न रहें। उससे तीन दिनों में ही आश्चर्य जनक लाभ महसूस होता है।
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